पार्थ-अर्पिता को नहीं मिली राहत

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को उन्हें कोलकाता के सिटी सेशंस कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोनों आरोपियों को 18 अगस्त तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले कोलकाता की एक विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी की हिरासत 5 अगस्त तक बढ़ा दी थी। ये अवधि आज खत्म होने पर उन्हें दुबारा कोर्ट में पेश किया गया। आज की सुनवाई में पार्थ चटर्जी के वकील ने कहा कि जब उनके घर पर छापा मारा था तो कुछ भी बरामद नहीं हुआ। इस मामले में ना तो कोई सामने आया है और ना ही किसी ने ये कहा कि उनसे रिश्वत मांगी थी। उधर ईडी के वकील ने दलील दी कि पार्थ चटर्जी को जमानत मिलने से वो सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और जांच को प्रभावित कर सकते हैं।

अर्पिता को जान का खतरा?

कोर्ट में अर्पिता मुखर्जी के वकील ने कहा कि जेल में उनकी जान को खतरा है। उनके भोजन और पानी की पहले जांच की जानी चाहिए। ईडी के वकील ने भी इस दलील का समर्थन किया कि उनकी सुरक्षा को खतरा है क्योंकि 4 से अधिक कैदियों को नहीं रखा जा सकता है। आपको बता दें कि पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता चटर्जी को स्कूल शिक्षक भर्ती मामले की जांच के सिलसिले में 25 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।