भोपाल। बीते दो महीने पहले केरवा डेम में नहाने गए तीन किशोरों की मौत के कुंए में डूबने से मृत्यु हो गई थी। इसके बाद यहां जाने से लोगों को रोकने के लिए प्रशासन ने लोहे की जालियां लगा दी। इसके बावजूद लोग जालियों को पार कर मौत के कुए में नहाने जा रहे हैं। जबकि यहां लगे बोर्ड में चेतावनी भी लिखी है, लेकिन लोग मौज-मस्ती के लिए इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। जब कोई बड़ी घटना होती है, तो पुलिस प्रशासन सख्त हो जाता है। इसके बाद लोग सैलानी भी अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी भूल जाते हैं।

बतादें कि हर रविवार केरवा डेम और बड़े तालाब समेत अन्य पर्यटन स्थलों में हजारों लोग पहुंचते हैं। इसके बावजूद ना तो इन स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए और ना ही पार्किंग व्यवस्था की गई। इससे यहां आने वाले लोग घंटो तक ट्रैफिक जाम में फंसे रहते हैं। इस मामले में निगम के तालाब संरक्षण प्रकोष्ठ के संतोष गुप्ता का कहना है कि निगम द्वारा शहर के विभिन्न जलाशयों में चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। यहां निगम के गोताखोर 24 घंटे मौजूद रहते हैं।

पर्यटनों स्थलों पर बढ़े छेड़छाड़ के मामले

राजधानी भोपाल से लगे महादेव पानी, भोजपुर, रायसेन दुर्ग, हलाली डेम, सतधारा में बीते एक साल में 50 से अधिक महिला पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में से इक्का दुक्का मामले को छोड़ किसी में भी पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है। पहली बात तो छेड़छाड़ का शिकार हुई महिला पर्यटक पुलिस के पचड़े में नहीं पड़ना चाहती और अगर कभी किसी मामले में महिला पर्यटक पुलिस की मदद लेना भी चाहे तो पुलिस की कार्यवाही का ढंग इतना बेतुका होता है कि पीड़ित पर्यटक घटना को भुला देने में अपनी भलाई समझती है। दूसरी बात यह कि पुलिस भी नहीं चाहती कि छेड़छाड़ और लूटपाट जैसे मामलों की ज्यादा कायमी हो, क्योंकि इससे उनका रिकार्ड खराब होता है।

इनका कहना

मौत के कुएं के आसपास जहां तक संभव था वहां जालीदार तार फेंसिंग कर दी है। कुछ हिस्सों में चट्टानें हैं वहां तार फेंसिंग करना बहुत मुश्किल था और इतने कम समय में यह काम कर पाना संभव ही नहीं था। लोगों को समझाइश देने के लिए वनकर्मियों की तैनाती बढ़ाएंगे। उस क्षेत्र में ज्यादातर युवा पहुंच रहे हैं। अभिभावकों से आग्रह है कि मौत के कुआं क्षेत्र में बच्चों को जानें से रोकें।

– आरएस भदौरिया, एसडीओ, भोपाल सामान्य वन मंडल